अध्याय 15 · पुरुषोत्तम योग · श्रीकृष्ण कहते हैं
गीता अध्याय 15, श्लोक 1 — संसार रूपी पीपल
श्रीभगवानुवाच। ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम्। छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित् ॥
śrībhagavānuvāca | ūrdhvamūlamadhaḥśākhamaśvatthaṃ prāhuravyayam | chandāṃsi yasya parṇāni yastaṃ veda sa vedavit ||
अर्थ
श्रीकृष्ण कहते हैं: संसार एक अविनाशी पीपल के पेड़ जैसा है, जिसकी जड़ ऊपर और शाखाएँ नीचे हैं। वेद के मंत्र इसके पत्ते हैं; जो इसे जानता है, वही वेदों का जानकार है।
आज के जीवन में
जब दुनिया की उलझनें भारी लगें, याद रखें कि इस पूरे पेड़ की जड़ ऊपर भगवान में है — वहीं से सहारा लें।