अध्याय 14 · गुणत्रयविभाग योग · श्रीकृष्ण कहते हैं
गीता अध्याय 14, श्लोक 26 — भक्ति से गुणों के पार
मां च योऽव्यभिचारेण भक्तियोगेन सेवते। स गुणान्समतीत्यैतान्ब्रह्मभूयाय कल्पते ॥
māṃ ca yo'vyabhicāreṇa bhaktiyogena sevate | sa guṇānsamatītyaitānbrahmabhūyāya kalpate ||
अर्थ
जो अटूट भक्ति योग से मेरी सेवा करता है, वह इन तीनों गुणों को पार करके ब्रह्म को पाने के योग्य हो जाता है।
आज के जीवन में
मन के उतार-चढ़ाव से लड़ने की जगह रोज़ थोड़ा समय सच्ची भक्ति में लगाएँ — मन अपने आप स्थिर होने लगता है।