अध्याय 12 · भक्ति योग · श्रीकृष्ण कहते हैं

गीता अध्याय 12, श्लोक 9 — अभ्यास का मार्ग

अथ चित्तं समाधातुं न शक्नोषि मयि स्थिरम्। अभ्यासयोगेन ततो मामिच्छाप्तुं धनञ्जय ॥

atha cittaṃ samādhātuṃ na śaknoṣi mayi sthiram | abhyāsayogena tato māmicchāptuṃ dhanañjaya ||

अर्थ

यदि तुम अपना मन मुझमें स्थिर नहीं रख पाते, तो हे धनंजय, अभ्यास-योग के द्वारा मुझे पाने की इच्छा करो।

आज के जीवन में

यदि मन आसानी से न टिके, तो रोज़ थोड़ी देर प्रार्थना या जप की आदत धीरे-धीरे उसे स्थिर कर देती है।

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