अध्याय 1 · अर्जुनविषाद योग · अर्जुन कहते हैं
गीता अध्याय 1, श्लोक 41 — सामाजिक अव्यवस्था
अधर्माभिभवात्कृष्ण प्रदुष्यन्ति कुलस्त्रियः। स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसङ्करः ॥
adharmābhibhavātkṛṣṇa praduṣyanti kulastriyaḥ | strīṣu duṣṭāsu vārṣṇeya jāyate varṇasaṅkaraḥ ||
अर्थ
हे कृष्ण, अधर्म बढ़ने पर कुल की स्त्रियाँ भटक जाती हैं, और उससे समाज में अव्यवस्था (वर्णसंकर) पैदा होती है।